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बाड़मेर, शहर, राजस्थान राज्य का दूसरा सबसे जिला बड़ा है । बाड़मेर राज्य के पश्चिमी पाकिस्तान सीमा पर सीमा से लगा जिला है बाड़मेर एक पहाड़ी पर स्थित है बाड़मेर रेतीले धोरों से गिरा एक सुंदर जिला है,




बाड़मेर का इतिहास एक नजर में-

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13 वी शताब्दी में राजा बहआड़ राव पुत्र धरणीधर राव परमार ने बाड़मेर की स्थापना की थी  जो जो वर्तमान में बाड़मेर से जाना जाता है
राजस्थान का यह क्षेत्र अपने पारंपारिक हस्तकला के लिए बहुत प्रसिद्ध है अपनी अलग पहचान रखता है बाड़मेर के प्राचीन शहरों में किराडू, खेड़,, पचपदरा, तिलवाड़ा, जसोल, बालोतरा, जूना, मालाणी शामिल है
1891 मैं बाड़मेर को जोधपुर के राज्य के साथ एकीकृत किया गया था और 1947 में आजादी के बाद बाड़मेर जोधपुर से अलग हुआ। बाड़मेर में परंपरागत कला शिल्प कढ़ाई और लोक संगीत के कारण दुनिया में प्रसिद्ध है , बाड़मेर बाड़मेर में सर्वाधिक अधिक गधे पाए जाते हैं और बाड़मेर में गुड़ामालानी तहसील में प्राकृतिक तेल व गैस के अपार भंडार प्राप्त हुए हैं कपड़े और लकड़ी पर हाथ द्वारा की गई कारीगरी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है 

बाड़मेर का भूगोल-

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राज्य की भौगोलिक स्थिति 24 डिग्री 32' उत्तरी अक्षांश एवं70 डिग्री 5' से 72 डिग्री 52' पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है इसके उत्तर में जैसलमेर दक्षिण में जालौर और पूर्व में पाली तथा जोधपुर जिले स्थित है, बाड़मेर जिले के पश्चिम में 228 किलोमीटर सीमा पाकिस्तान से लगी हुई है।
बाड़मेर जिले की सबसे ऊंची और लंबी पहाड़ी छपन की पहाड़ी समुद्र तल से 3727 फीट ऊंची तथा 22 किलोमीटर लंबी है। जिले की प्रमुख नदियों में सबसे प्रमुख नदी लूनी नदी है जो 480 मील की लंबाई में बहती है जो बाड़मेर के रामपुर गांव में प्रवेश कर गंधव जालौर होते हुए कच्छ के रण में मिल जाती है । नदी का पानी बालोतरा तक मिठ ा तथा बालोतरा के बाद लूनी नदी का पानी खारा हो जाता है।  बाड़मेर का क्षेत्रफल 28387 वर्ग किलोमीटर है। बाड़मेर जिले की कुल जनसंख्या 26.03 लाख है जिसमें से पुरुषों की जनसंख्या 13.69 लाख तथा स्त्रियों की संख्या 12.34 लाख है बाड़मेर का कुल लिंगानुपात 902 है साक्षरता दर फिफ्टी सिक्स पॉइंट 53% यह यह सभी आंकड़े जनसंख्या 2011 के अनुसार है ।

               बाड़मेर जिले के प्रमुख स्थल

बाड़मेर का जैन मंदिर -

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 बाड़मेर में स्थित पाशवरनाथ  का जैन मंदिर सुंदर देवदर्शनी है यह जैन मंदिर से यह मंदिर शहर के पश्चिम भाग में स्थित पहाड़ियों पर स्थित है जिसका निर्माण मान्यता अनुसार 12 वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है मंदिर अपने शिल्प कला तथा कांच तथा चित्रकला के आकार के रूप में बहुत ही दर्शनीय है

खेड़ राव मल्लीनाथ ने इसी स्थान से ही राज्य का विस्तार किया था यह स्थान लूनी नदी के किनारे स्थित है जोधपुर - बाड़मेर रेल मार्ग पर खेड़ स्टेशन एक वैष्णव तीर्थ स्थान है प्राचीन काल में  राठौड़ राजपूतों की राजधानी थी जिसमें एक मंदिर रणछोड़ रणछोड़ राय जी का है यहां के भूरिया बाबा तथा खेड़िया बाबा पूजनीय है माघ मास में यहां रेबारी जाति के लोग विशेष रूप से पूजा अर्चना करने आते हैं 

किराडू-


उत्त

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र पश्चिम में करीब 33 किलोमीटर दूर बाड़मेर मुनाबाव रेल लाइन के स्टेशन पर स्थित  स्टेशन से उत्तर में हत्मा  गांव के समीप एक ऐतिहासिक स्थल है या पांच मंदिर विद्वामान है किराडू का प्राचीन नाम कीरत कूप होना बताया जाता है । यहां पर बिखरे पाषाण से मालूम होता है कि यहां पर पूर्व में कोई नगर ब्सा हुआ होगा  ।
यहां पर पांच मंदिर विधमान हैं। शिल्प कला कृतियों का एक प्रमुख केंद्र है। यहां के मंदिर के खंभों पर 1161 ईस्वी काल का शिलालेख स्थित है। क्योंकि प्रत्येक मंदिर पर स्थित शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण मिल जाता है।

नाकोड़ा

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जोधपुर बाड़मेर के मध्यवर्ती बालोतरा जंक्शन से लगभग 9 किलोमीटर दूर पश्चिम में श्वेतांबर जैन संप्रदाय का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान नाकोडा है इसे मेवानगर के नाम से पहचाना जाता है यहां प्रतिवर्ष पौष बदी दशमी को श्री पाशवर नाथ  के जन्मोत्सव पर विशाल मेला लगता है साहित्य कला की दृष्टि से या आदिनाथ तथा शांति नाथ के मंदिर पर बेजोड़ त था यह दर्शनीय है।

जूना

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जूना बाड़मेर की एक पहाड़ी पर प्राचीन किला है उसकी परिधि लगभग 15 किलोमीटर है नाम से जाना जाता है
चुनाव प्राचीन समय में यहां पर यह बहुत व्यस्त हूं नगर था लेकिन धीरे-धीरे या के बिखरे लोगों ने ही बाद में बाड़मेर का निर्माण किया

विरात्रा माता का मंदिर चौहटन
बाड़मेर से लगभग 48 किलोमीटर दूर स्थित चौहटन तहसील के विरात्रा गांव जो लगभग चौहटन से 10 किलोमीटर दूर स्थित है जो मुदगल के वृक्षों के बीच रमणीय पहाड़ियों की एक घाटी  पर विरात्रा माता का मंदिर स्थित  है 400 वर्ष पुराना माना जाता है यहां पर   चैत्र भाद्र तथा आग महीने में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को विशाल मेले लगते हैं 

कोटडा का किला

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बाड़मेर के रेगिस्तान के अंचल में एक छोटे से भाखर पर स्थित बाड़मेर के शिव तहसील के कोटडा गांव में बना हुआ है यहां प्राचीन समय में जैन संप्रदाय की विशाल नगरी थी किले का निर्माण किराडू के परमार शासकों ने करवाया था।
शिलालेख पर विक्रम सावंत 123 लिखा है किले में सुंदर शिल्प कलाकार थे से युक्त एक मेडी भी है मान्यता के अनुसार इसे मारवाड़ के खांजांची गोवर्धन खींची ने बनवाया था । मैं पीने के पानी के लिए सर गला नाम का कुआं भी है। जो वर्तमान में बाड़मेर के शिव तहसील में कोटरा गांव पर स्थित है।

कपालेश्वर महादेव

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बाड़मेर जिले के चौहटन तहसील में यह स्थान विद्व मान  है बाड़मेर से लगभग 50 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है चौहटन की विशाल पहाड़ियों के बीच कल्पेश्वर महादेव के मंदिर है जो मान्यता के अनुसार तेरी शताब्दी के दयाल लिए वर्तमान में सुंदर शिल्प कला के लिए भी प्रसिद्ध है माना जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास का अंतिम समय यही छिपकर बताया था यहां तीन शिव मंदिरों के अवशेष विद्वान है कपालेश्वर से करीब 8 किलोमीटर दूर पागलिया नामक पवित्र स्थल है यहां भगवान विष्णु के चरण चिन्ह पूजे जाते हैं इन स्थानों के आस-पास पति वर्ष सोमवती अमावस को बहुत भारी मेला लगता है इस प्रकार प्रत्येक 12 वर्ष विशाल मेला भरता है इसे कुंभ मेले का लघु मरुस्थली रूप भी माना जाता है। जिसे अर्धकुंभ अभी कहा जाता है यहां के पहाड़ों पर १४ शताब्दी के एक दुर्ग के अवशेष भी  है जिसे हापाकोट कहते हैं। अनुसार इसका निर्माण जालौर के सोनगरा राजा कन्हादेव देव के बड़े भाई सालम सिंह के पुत्र हापा  ने करवाया था। इसी कारण इसको वर्तमान में हापा गढ़ या हापकोट भी जाना जाता है।

malinhat ka mandir

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यह स्थल बाड़मेर जिले की तहसील बालोतरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर लूनी नदी के तलहटी में स्थित है। राv मल्लिनाथ ने यही की समाधि ली थी समाधि स्थल पर भक्तजनों द्वारा बना मल्लीनाथ मंदिर एवं उनके चरण पादुका ए दर्शनीय हैं। इस स्थान पर प्रतिवर्ष चैत्र मास में 15 दिन तक विशाल पशु मेला लगता है जैसे मल्लिनाथ का मेला तथा तिलवाड़ा पशु मेला के नाम से भी जाना जाता है। यह चैत्र मास एकादशी  कृष्णा से चित्र मास शुक्ला  11 तक लगता है इसमें भारी संख्या में पशुओं का क्रय-विक्रय भी होता है। 

जसोल

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बाड़मेर जिले के पूर्व में स्थित बालोतरा कस्बे से पश्चिम की तरफ बालोतरा मेवानगर नाकोडा के बीच  चाहिए प्राचीन नगर विद्वान है । यह मारवाड़  शासकों का निवास स्थान रहा है। जसोल में 12 वीं एवं 16 वीं शताब्दी में बने जैन मंदिरों के अलावा माताजी का मंदिर दर्शनीय है । जसोल में माता रानी भटियाणी का मंदिर प्रसिद्ध है जहां पर बहुत दूर दराज से भक्तजन पहुंचते हैं जसोल में भादवा सुदी १३ को विशाल मेला भरता है। 

gरीब नाथ का शिव मंदिर

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यह बाड़मेर से करीब 55 किलोमीटर उत्तर की तरफ बाड़मेर जैसलमेर मार्ग पर स्थित है माना जाता है कि इसकी स्थापना विक्रम सावंत 900 
में जोशी कमलनाथ जी ने की थी जिसका पुराना नाम शिवपुरी एवं शिवबाड़ी होना बताया जाता है

आलम जी का मंदिर
यह दर्शनीय स्थान बाड़मेर जिले के धोरीमना पंचायत किस समिति मुख्यालय पर स्थित है यह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है बाड़मेर में यह स्थान दक्षिण में लगभग 66 किलोमीटर दूर है या पहाड़ी की ओट में आलम जी का मंदिर बना हुआ है यहां हर वर्ष भारी मेला लगता है ।

सिवाना दुर्ग

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सिवाना का किला इतिहास विख्यातराया किला सिवाना तहसील तथा पंचायत समिति मुख्यालय पर ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ जिसका निर्माण पावा राजा भोज पुत्र श्री वीर नारायण ने करवाया था जिले में पानी का बड़ा तालाब तथा निवास के महल पर भी टूटी-फूटी हालत में देखने को मिलते हैं जिले के मुख्य द्वार की विशालता योद्धाओं की विधि तो भावनाओं को बोलती तस्वीर लगती है
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बाड़मेर की प्रमुख परियोजनाएं

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इंदिरा गांधी नहर परियोजना

इंदिरा गांधी नहर परियोजना को हरिके बैराज से बाड़मेर के गडरा रोड तक नहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर को जलापूर्ति हो सके

नर्मदा घाटी परियोजना- 28 मार्च 2008 को नर्मदा नहर के माध्यम से नर्मदा का पानी राजस्थान में पहुंचा। वर्तमान में बाड़मेर के गुड़ामालानी तहसील व जालोर के सांचौर तहसील लाभा विनीत हो रही है 

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बाड़मेर का विधानसभा इतिहास

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बाड़मेर में कुल 7 विधानसभा सीटें जिसमें 6 ग्रामीण और एक बाड़मेर शहरी सीट है बाड़मेर में प्रथम आम चुनाव में

  1.  1951 में तन सिंह रामराजे पार्टी से विधायक बने जिनके सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता वृधीचंद पार्टी कांग्रेस को हराया इसके बाद दूसरी आम चुनाव
  2.  1957 में भी तन सिंह रामराज्य पार्टी से चुनाव जीते जिनके सामने रुकमणी कांग्रेस पार्टी को हराया। 
  3. 1962 में उमेद सिंह निर्दलीय प्रत्याशी जीते जिनके सामने कांग्रेस के वृधीचंद को हराया
  4.  1967 में वर्दी चंद कांग्रेस से जीते जिनके सामने उम्मीद सिंह को हराया इसके बाद 1972 और 1977 में भी वृधीचंद ने उम्मीद सिंह को हराया
  5. इसके बाद
  6.  1980 में कांग्रेस के देवदत्त जीते इनके सामने  रतनलाल को बीजेपी को हराया 
  7. 1985  में गंगाराम चौधरी लोकदल से जीते जिनके सामने रिखबदास कांग्रेस को हराया
  8. 1990 मैं गंगाराम चौधरी जनता दल जीते सामने हेमाराम कांग्रेस
  9.  1993 मैं फिर गंगाराम चौधरी सामने वृधीचंद को हराया
  10.  1998वृधीचंद कांग्रेस से तगाराम बीजेपी को हराया 
  11. 2003 मैं तगाराम बीजेपी से वृधीचंद को हराय। 
  12. 2008 मैं मेवाराम जैन सामने मधु रेखा बीजेपी को हराया 
  13. 2013 मेवाराम जैन जैन कांग्रेस से प्रियंका चौधरी बीजेपी को हराया
  14.  2018 मेवाराम जैन कांग्रेस ने सोनाराम बीजेपी को हराया अब तक 

बाड़मेर का लोकसभा इतिहास

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  1. 1957 रघुनाथ सिंह INC जीते सामने गोवर्धन दास
  2. 1962 तन सिंह RRP जीते सामने ONKAR सिंह बिनानी
  3. 1967 अमृत नाहटा INC जीते सामने तन सिंह
  4. 1971 अमृत नाहटा INC जीते सामने भैरों सिंह शेखावत
  5. 1977 तन सिंह BLD जीते के सामने खेत सिंह
  6. 1980 VIRDHI CHAND INC से जीते सामने चंद्रवीर सिंह
  7. 1984 VIRDHI CHAND INC से जीते सामने गंगाराम चौधरी
  8. 1989 कल्याण सिंह कालवी JD से  जीते सामनेVIRDHI CHAND
  9. 1991 मैं रामनिवास मिर्धा INC सामने कमल विजय
  10. 1996 IN सोनाराम INC सामने जोगेंद्र सिंह
  11. 1998 सोनाराम INC जीते सामने लोकेंद्र सिंह
  12. 1999 सोनाराम INC से जीते सामने मानवेंद्र सिंह
  13. 2004 मानवेंद्र सिंह बीजेपी जीते सामने सोनाराम
  14. 2009 हरीश चौधरी INC सामने मानवेंद्र सिंह
  15. 2014 सोनाराम बीजेपी से जीते सामने जसवंत सिंह निर्दलीय
  16. 2019 कैलाश चौधरी बीजेपी के सामने मानवेंद्र सिंह कांग्रेस से हारे अब तक

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