चौहटन का इतिहास History of Chothan

चौहटन का इतिहास History of Chothan

चौहटन का इतिहास History of Chothan



चौहटन राजस्थान राज्य के दूसरे सबसे बड़े जिले की एक प्रमुख तहसील है। चौहटन बाड़मेर जिला मुख्यालय से करीबन 50 किलोमीटर पश्चिम की और पाक सीमा से सटा कस्बा है। चौहटन का पुराना नाम चौथा पुर पाटन नगरी था। चौहटन पाक सीमा से इलाका है। चौहटन भारत पाक सीमा से मात्र 45 किलोमीटर दूर बसा हुआ है।
मान्यताओं के अनुसार पांडवों ने अपने वनवास का अधिकांश समय चौहटन में ही व्यतीत किया था चौहटन में बाड़मेर रोड पर चीफल नाडी है।
चीफल नाडी का निर्माण वर्षों  पूर्व भीमजी पांडव ने खेल-खेल में ही करवाया था।  इसका पानी पूरे साल तक खत्म नहीं होता है । इसमें पानी चौहटन की पहाड़ियां से आता है । 
चौहटन पूर्व मारवाड़ रियासत के अधीन आता था आजादी के उपरांत  1949 में बाड़मेर जिला बनने पर यह बाड़मेर का हिस्सा बन गया था। इसके बाद 1957 मैं चौहटन एक विधानसभा क्षेत्र बन गया । पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार यहां पर कुछ समय पांडव ठहरे थे के कुछ अवशेष और गुफाएं भी मौजूद है।  पूर्व में यह पाकिस्तान क्षेत्र से अधिक संबंधित था और लोगों के ज्यादातर रिश्ते नाते पाकिस्तान से हुआ करते थे । चौहटन में एक प्राचीन हापा कोट का किला भी है जिसका निर्माण कान्हड़ देव के भाई हापा जी चौहान ने करवाया था। माना जाता है इसी चौहान शब्द से चौहटन का नाम पड़ा 


चौहटन के प्रमुख स्थल-

सुइयां धाम -

सुईया धाम को अर्ध कुंभ भी कहते हैं यहां पर सुईया मेला भरता है जो विक्रम सावंत मैं पौष माह, अमावस, सोमवार, मूल नक्षत्र का योग एक साथ बनने पर जहां पर विशाल कुंभ मेला भरता है। सुईया धाम मान्यताओं के अनुसार चौहटन में भरने वाला मरू कुंभ का मेला कुंभ के मेला से उच्च व पवित्र माना जाता है पांडवों की तपो भूमि और डूंगरपुरी जी महाराज की कर्म स्थली चौहटन में मरू कुंभ के नाम से विशाल मेला भरता है
यहां पर हाल ही में साल 2018 मैं 12 बरस के उपरांत विशाल मेला  था इसमें 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे 
 यहां पर पवित्र स्नान की भी परंपरा है मान्यताओं के अनुसार यहां पर स्नान करना बहुत ही पवित्र माना जाता है यहां पर लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं ।
सैया मेला के दिन महादेव का झरना, कपालेश्वर महादेव मंदिर का झरना, धरमराज की बेरी व इंद्रभान तालाब के पांचो स्थलों के पवित्र जल से स्नान करते हैं 
सुईया मेला मेले में आने वाले श्रद्धालु अपनी भुजा पर मठ की और मेले की छाप  लगाते हैं मान्यताओं के अनुसार देश भर के समस्त पवित्र स्थलों की छाप से सुइयां की छाप सबसे उपर लगती है । 
सूईंया मेला कभी 4,7,12 और 17 साल के अंतराल में योग अनुसार लगता है। विक्रम संवत 2000 से 2099 के बीच 16 मेले होने का योग है। अंग्रेजी वर्ष 1943, 1946, 1949,1956, 1970,1974, 1977,1990,1997,2005 में सूईंया का मेला लगा था। वहीं इस बार दिसंबर 2017 में होने वाले मेले के बाद वर्ष 2024, 2027, 2032 एवं 2041 में सूईंया मेला भरेगा

विरात्रा मां वाकल का मंदिर-

यहां पर परमार वंश राजपूतों की कुलदेवी वाकल मां का पुराना मंदिर है । हर वर्ष यहां पर भारी विशाल मेला भरता है।


नीमड़ी माता -

यह बाड़मेर चौहटन रास्ते पर स्थित नीम्बड़ी माता  जी का मंदिर है जिसके कारण यहां गांव का नाम भी नीमड़ी पड़ा ।

हापा कोर्ट दुर्ग-

का निर्माण सोनगरा चौहान वंश राजपूतों ने करवाया था यह वर्तमान में खंडहर की हालात में

मालाणी के महादेव मोहनपुरी जी की धर्म धरा जहां पर महादेव का एक बड़ा मंदिर है 

चौहटन का मठ-

चौहटन मठ का इतिहास लगभग 300 वर्ष पुराना है, पूर्व में जूना अखाड़ा के तपस्वी सन्यासियों के समूह में तिलकधारी सहजपुरी के शिष्यों ने हरियाणा में मुन्डोता के पास सह्जावत सहजावत मढ़ी का मठ स्थापित किया उस मठ की शाखाओं में सजावत मढ़ी के कई मठ
स्थापित हुए उसी परम्परा के विकास स्वरुप स्वामी श्री भावपुरी जी के
प्रतिभाशाली शिष्य श्री डूंगरपुरी जी ने यह मठ स्थापित किया एवं अपने
परम तप के कारन समस्त देवी देवताओं को चौहटन की भूमि पर
आह्वान करके सशरीर प्रत्यक्ष बुलाकर मठ की दिव्य ज्योत को प्रकट
किया साथ ही सनातन धर्म के सत्य कर्म सत्संग ज्ञान भक्ति एवं आरोग्य
उपचार की कल्याणकारी सेवा का शुभारम्भ किया 


चौहटन के प्रमुख योद्धा-

बलवंत सिंह बाखासर-

यह बाखासर जागीरी ठिकाने के ठाकुर थे उत्तर पर यही राज करते थे साथ ही इन्हें दीन दुखियों के मदद के लिए भी याद किया जाता है जब 1971 मैं भारत पाक युद्ध छेड़ा तो 10 राइफल के साथ जयपुर के महाराजा भवानी सिंह को चौहटन सीमा पर भेजा महाराजा भवानी सिंह बलवंत सिंह के परिचित थे उस वक्त बलवंत सिंह पर सैकड़ों पुलिस के केस दर्ज दे पर उसे नजरअंदाज करते हुए भवानी सिंह बलवंत सिंह चौहान से मिले और उन्हें युद्ध के बारे में बात की बलवंत सिंह तत्काल अपनी दो जोंगा गाड़ी पर सवार होकर भारतीय सेना इस सेना का नेतृत्व किया स्थान बलवंत सिंह पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र  के बारे में काफी जाने पहचाने थे बलवंत सिंह सिंध क्षेत्र के भूल भुलैया क्षेत्र को पार करते हुए पाकिस्तानी सेना को नष्ट ना बूत कर दिया इसके उपरांत पता चला कि बलवंत सिंह चौहान के नेतृत्व में जीत गया   क्षेत्र अब तक के जीते गए भारत के क्षेत्र से भी अधिक था
जीत के उपरांत बलवंत सिंह पर दर्ज सैकड़ों पुलिस केस वापस कर लिए गए सेना द्वारा दिए गए हथियार भी वापस नहीं लिए इसके बाद गलत सिंह चौहान को रॉबिनहुड के नाम से भी जाना जाने लगा 

हेम सिंह राठौड़-

1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना चौहटन के क्षेत्र में घुस गई और कुछ नागरिक की हत्या कर एक महिला को उठाकर ले गए इतना सुनकर ठाकुर हेम सिंह राठौड़ का खून खौल गया और तत्काल पाकिस्तान की सीमा पहुंचे और 25 पाकिस्तानियों की हत्या कर दी साथ ही महिला को समान पूर्वक  वापस लाए हेम्म सिंह राठौड़ ने भारतीय सेना का भरपूर साथ दिया 

चुतर सिंह भोपा 

भारत पाकिस्तान युद्ध 1965 में पाकिस्तान के आक्रमण के समय भारतीय सेना के मदद के लिए dhok के सरपंच चुतर सिंह भोपा 25 उट पर सवार बमबारी के बीच भारतीय सेना को पाकिस्तानी क्षेत्र में राशन पानी पहुंचा ते रहे के उपरांत राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद है उन्हें सम्मानित भी किया चौहटन का इतिहास History of Chothan

बाड़मेर जिले से 50 किलोमीटर दूर जालौर और पाक सीमा से सटा हुआ कस्बा साथ ही यह बाड़मेर का सबसे अधिक जनसंख्या वाला विधानसभा क्षेत्र है और क्षेत्रफल में शिव के बाद दूसरे स्थान पर क्षेत्र को मालाणी के नाम से भी जाना जाता है यह क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ क्षेत्र है 2011 की जनगणना के अनुसार चौहटन राजस्थान की सबसे कम साक्षरता वाली तहसील भी हैं यहां की महिला साक्षरता 40% है से भी कम है साथ ही यहां के लोग का कृषि व पशुपालन मुख्य व्यवसाय हैं और क्षेत्र हैं कांकरेज गाय की नस्ल और गोद के लिए भी प्रसिद्ध है साथ ही यहां पर राजस्थान की सबसे बड़ी ओरन पंचायत है
 चौहटन के अब वर्तमान समय में 3 तहसीलें भी बन चुकी है धनाऊ, सेड़वा और फागलिया



चौहटन का का विधानसभा इतिहास

चौहटन 1957 में विधानसभा के रूप में स्थापित हुआ
1957 में प्रथम
1957 में वाली मोहम्मद कांग्रेस से सामने नाथू सिंह
1962 मैं फतेह सिंह सामने आरआरपी से सामने अहमद बक्स कांग्रेस से
1967 मैं अब्दुल हादी कॉन्ग्रेस से सामने फतेहपुरी स्वतंत्र पार्टी
1971 अब्दुल हादी कांग्रेसी सामने मूलाराम निर्दलीय
1975 अब्दुल हादी कांग्रेश सामने अब्दुल हक जनता पार्टी
1980 भगवानदास कांग्रेस i सामने अब्दुल आदि कांग्रेसo
1985 अब्दुल आदि लोकदल सामने मोहनदास कांग्रेश
1990 अब्दुल हादी जनता दल सामने गणपत सिंह बाखासर कांग्रेस
1993 भगवानदास निर्दलीय सामने अब्दुल आदि कांग्रेस
1998 कांग्रेस सामने भगवानदास बीजेपी
2003 गंगाराम चौधरी बीजेपी सामने अब्दुल आदि कांग्रेस
2008 चौहटन विधानसभा आरक्षित सीट पदमाराम मेघवाल कांग्रेश सामने तरुण राय कागा बीजेपी से
2013 तरुण राय कागा बीजेपी से सामने पदमाराम मेघवाल कांग्रेस से
2018 पदमाराम कांग्रेस से सामने आदुराम मेघवाल बीजेपी से हारे अब तक
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